Mutual fund definition: म्यूचुअल फंड क्या है और कितने प्रकार का होता है

दोस्तो, आजकल टेलीविजन पर एक विज्ञापन लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रहा है जिसकी टैग लाइन है म्यूचुअल फंड्स सही है। आपने भी इस विज्ञापन को कभी न कभी अवश्य देखा होगा। इसे देखकर क्या कभी आपके मन में म्यूचुअल फ़ंड के बारे में जानने की उत्कंठा  हुई है? क्या कभी  आपके दिमाग में आया कि What is mutual fund definition or what is the meaning of mutual fund? म्यूचुअल फंड्स क्या है कैसे काम करते हैं?

अमूमन देखा गया है कि भारत में अधिकतर लोगो मे financial education या वित्तीय ज्ञान का अभाव है। फाइनेंशियल प्लानिंग सिर्फ FD, रियल एस्टेट और सोने तक ही सिमट कर रह गई है। लेकिन पैसा बनाने व बचाने का सबसे बड़ा जो जरिया(म्यूचुअल फंड) है उससे आम लोग अनभिज्ञ हैं।
mutual fund definition

लेकिन चिंता मत कीजिए आज के इस ब्लॉग मे मै आपको Mutual fund definition और म्यूचुअल फंड्स कितने प्रकार के होते हैं और कैसे काम करते हैं और म्यूचुअल फंड के फायदे और नुकसान क्या क्या है वो सब बिल्कुल सरल और सहज भाषा में बताऊंगा। 

mutual fund definition

Mutual fund definition

mutual fund definition

Mutual fund definition: म्यूचुअल फंड एक वित्त भंडार है जिसमे वित्त के भंडारण के लिए पैसे को समान उद्देश्यों वाले निवेशकों से खींचा जाता है और फिर निवेशकों की उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस वित्त भंडार को विभिन्न कम्पनियों के स्टॉक, बॉन्ड, वित्त बाजार के इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य एसेट मे निवेश किया जाता है।

इसी कथन को अगर सरल भाषा में बोला जाए तो म्यूचुअल फंड्स पैसे का वो फ़ंड है जब बहुत से लोग मिलकर (mutually) पैसा इकठ्ठा करते हैं और फिर किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति जैसे कि कैपिटल गेन, टैक्स सेविंग या इंकम इत्यादि के लिए उस पैसे को कम्पनियो के स्टॉक्स, मार्केट बॉन्ड्स और अन्य इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं। 

म्यूचुअल फंड को किसी प्रोफेशनल फ़ंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है। फ़ंड का पैसा किस किस स्टॉक या बॉन्ड में लगाना है ये पूरा निर्णय फंड मैनेजर का होता है। फंड मैनेजर फ़ंड के पोर्टफोलियो को इस तरीके से निर्धारित करता है जो निवेशकों के उद्देश्य की पूर्ति कर सके। 

म्यूचुअल फंड क्या होता है इसको आप इस उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं। 

mutual fund definition

माना कि आप किसी बहु मंजिला इमारत में कोई फ्लैट खरीद कर रह रहे हैं। आप की तरह ही बहुत से अन्य लोग भी फ्लैट खरीद कर उसी इमारत में रहते हैं और दुर्भाग्य से सरकार या अन्य कोई व्यक्ति की तरफ से इमारत को अवैध बताकर इमारत की जमीन पर केस कर दिया जाता है और आपका बिल्डर भाग जाए तो आप क्या करेंगे? 

आप समेत इमारत के सभी निवासियों को अब अपनी बिल्डिंग बचानी है आप सब लोगों का अब कॉमन उद्देश्य है और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप कोर्ट जाते हैं। 

इसके लिए आप सब मिलकर एक वकील के पास जाते हैं और अपने केस की डिटेल उससे बताते हैं और केस किस उद्देश्य से लड़ना है वो भी बताते हैं। 

आप वकील के पास इसलिए गए क्योंकि आपको कानूनी प्रक्रिया और अदालती दाँव पेंच का ज्ञान नहीं है आपको नहीं पता कि केस जीतने के लिए आपको किन किन सबूतों की आवश्यकता पड़ेगी और किस तरह से जज के सामने अपनी बात रखी जाए लेकिन वकील चूंकि कानूनी दाँव पेंच का ज्ञाता है और इस क्षेत्र में उसको भरपूर अनुभव भी है इसलिए आप अपने केस की फाइल को वकील के हवाले कर देते हैं। 

इस काम के लिए आप सब मिलकर वकील को फीस भी देते हैं फिर वकील आपके केस को इस तरह से नियंत्रित करता है जिससे केस में आपके मनोवांछित रिज़ल्ट मिल सके। हालांकि हर बार रिज़ल्ट आपकी आशा अनुरूप हो ऐसा जरूरी नहीं है।

आप में अगर काबिलियत है और जटिल कानूनी प्रक्रिया का आपको ज्ञान है तो आप खुद भी केस लड़ सकते हैं।

म्यूचुअल फंड भी बिल्कुल ऐसे ही है समान उदेश्य जैसे कि कैपिटल गेन (निवेश के के जरिए पैसे में वृध्दि), टैक्स सेविंग या आमदनी के लिए निवेशकों (कॉमन पब्लिक+घरेलू संस्थागत निवेशक +विदेशी संस्थागत निवेशक) से पैसे लेकर एक म्यूचुअल फंड बनाया जाता है और इस फ़ंड के पैसे को स्टॉक मार्केट की कंपनियो के शेयरों या मार्किट बोंड में निवेश किया जाता है। 

इस पैसे को एक financial एक्सपर्ट या शेयर मार्केट विशेषज्ञ द्वारा शेयर बाजार की विभिन्न कम्पनियो के शेयरों को मिला कर बनाए गए एक portfolio में डाला जाता है। इस काम के लिए फ़ंड मैनेजर थोड़ी सी फीस भी लेता है। समय के साथ इस निवेशित पैसे से जो नफा या नुकसान होता है उसको निवेशकों द्वारा निवेशित पैसे के हिसाब से आपस में बांट लिया जाता है। 

अभी तक आपने ये जाना
(mutual fund definition)

      • म्यूचुअल फंड्स पैसे का एक फ़ंड है और इस पैसे का निवेश धन लाभ के लिए शेयर बाजार की विभिन्न कम्पनियों और बॉन्ड्स में एक फ़ाइनेंस मार्किट के विशेषज्ञ और प्रोफ़ेशनल फंड मैनेजर द्वारा किया जाता है।
      • पैसे का निवेश म्यूचुअल फंड में नहीं किया जाता बल्कि mutual fund के द्वारा कई कंपनियों के शेयर समूह में किया जाता है।
      • म्यूचुअल फंड्स को विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रकार की श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। 
      • फंड की श्रेणी इस बात पर निर्भर करती है कि फ़ंड का निवेश किस क्षेत्र, कितने समय, कितने रिटर्न और कितने बड़े मार्किट कैप की कंपनियों में किया गया है।
      • Mutual funds, फंड के मैनेजमैंट के लिए कुछ वार्षिक फीस चार्ज करते हैं।

किसी mutual fund के शेयर में निवेश करना और सीधा किसी कंपनी के स्टॉक में निवेश करने का मतलब है हम उसमे कुछ हिस्सेदारी(शेयर) खरीद रहे हैं लेकिन इन दोनों चीजों में बड़ा अंतर ये है कि कंपनी के शेयरधारक की तरह म्यूचुअल फंड के शेयर धारक को voting राइट्स नहीं होते।

Mutual fund का प्राइस कैसे निर्धारित होता है 

 

किसी mutual fund का प्राइस इस बात पर निर्भर करता है कि उन कंपनियों का परफॉर्मेंस कैसा है जिनके शेयर को फ़ंड मैनेजर अपने पोर्टफोलियो में शामिल करता है। 

Mutual fund के शेयर प्राइस को NAV(Net asset value) कहा जाता है।

एक स्टॉक प्राइस की तरह दिन में ट्रेडिंग hours के दौरान NAV का प्राइस घटता बढ़ता नहीं है। 

किसी फंड का NAV दिन के आखिर में ट्रेडिंग हावर्स के बाद तय होता है। किसी दिन का NAV उस दिन उस फंड के पोर्टफ़ोलियो की वैल्यू को उस फंड के आउटस्टैंडिंग शेयर से डिवाइड करके निर्धारित किया जाता है।

यह भी पढ़ें – NAV क्या है? कैसे CALCULATE होता है

Types of mutual fund (म्यूचुअल फंड के प्रकार) 

 

आज के समय में हर तरह के निवेशक और निवेशक की महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु कोई ना कोई mutual fund उपलब्ध है। अगर निवेशक को थोड़े समय में ज्यादा फायदे के लिए पैसा लगाना है तो इसके लिए अलग फंड है लेकिन ऐसे फंड में रिस्क भी उतना ही होगा।
(mutual fund definition)

इसी तरह सुरक्षित निवेश करने के लिए अलग म्यूचुअल फंड्स है। निवेशक की approach के आधार पर Mutual funds को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है 

     1.  Equity funds (इक्विटी फंड्स) 

     2.  Fixed income or debt fund (फ़िक्स्ड इंकम फ़ंड) 

     3.  Hybrid fund (हाइब्रिड फंड) 

     4.  Index fund (इंडेक्स फंड) 

     5.  Income fund(इन्कम फंड) 

     6.  Sector fund (सैक्टर फंड) 

     7.  ETF

1.Equity fund 

 

What is Equity fund (इक्विटी फंड क्या है)

Equity fund म्यूचुअल फंड्स की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय श्रेणी है। जैसा कि नाम से ही ज्ञात हो रहा है equity fund मे अधिकतम पैसा सीधे equity यानी कि स्टॉक वैल्यू में निवेश किया जाता है।

इक्विटी फंड म्यूचुअल फंड की सबसे हाई रिस्क वाली श्रेणी है लेकिन इनमे प्रॉफिट भी उतना ही दमदार होता है। 

Equity fund भी कंपनियों की market cap और निवेशक की इनवेस्टमेंट अप्रोच के हिसाब से अलग अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं। जैसे कि :

  1. स्माल कैप (small cap fund)
  2. मिड कैप (midcap Fund)
  3. लार्ज कैप (Large cap fund) 
  4. मल्टी कैप (Multi cap fund)

Small cap fund

स्माल कैप फंड उन म्यूचुअल फंड को बोला जाता है जिसमे फंड का अधिकतम पैसा small market cap की कंपनियों में निवेशित किया जाता है।

Small market cap company वो होती है जिनका मार्केट वैल्यू 5000 करोड़ रुपए से कम की है। इन कंपनियों में मुख्य रूप से नई कम्पनियां या छोटे कारोबार वाली कंपनियां शामिल होती है।   bombay dyeing, birla Corp इत्यादि इसी श्रेणी की कंपनियां हैं। 

एक फंड मैनेजर अपने पोर्टफोलियो में उन small cap companies को रखता है जिसके ग्रोथ की संभावना भविष्य में सबसे अधिक होती है।

Small cap fund निवेशकों को सबसे ज्यादा प्रॉफिट देने के लिए जाने जाते हैं लेकिन इनमे रिस्क भी उतना ही ज्यादा होता है क्योंकि छोटी कंपनियों के शेयर या तो बहुत तेजी से बढ़ते हैं या तेजी से गिरते हैं। इसलिए small cap funds को high risk – high reward fund भी बोला जाता है।

 
Midcap fund
 
Mid cap fund उन म्यूचुअल फंड्स को बोला जाता है जिसमे फंड मैनेजर फंड का अधिकतम पैसा मिड साइज की कंपनियों में निवेश करता है।

Mid cap company in India वो कंपनी होती है जिसका मार्किट कैप 5000 करोड़ रुपए से लेकर 20000 करोड़ रुपए के बीच होता है। ये वो कंपनियाँ होती है जो अपने कारोबार क्षेत्र में पाँव जमा चुकी है। ashok leyland, nippon life इत्यादि कंपनियां इसी श्रेणी की कंपनियां हैं। 

Midcap funds भी हाई रिस्क-हाई प्रॉफिट के लिए जाने जाते हैं।

Largecap fund

ये equity mutual fund की वो श्रेणी है जिसमे फंड मैनेजर फंड का पैसा बड़े मार्किट कैप की कंपनियों में पार्क करता है।

20000 करोड़ रुपए से ऊपर की मार्किट कैपिटल से ऊपर वाली कंपनियों को large cap कंपनी बोला जाता है। इन कंपनियों को bluechip companies और इनके स्टॉक्स को bluechip stocks कहा जाता है।

इन कंपनियों में reliance industries, TCS, Infosys, ICICI Bank, hdfc bank, sbi bank आदि कंपनियां शामिल हैं।

Largecap funds, स्माल कैप और मिडकैप फंड की तुलना में कम रिस्की होते हैं लेकिन इनमे प्रॉफिट भी स्माल कैप और मिडकैप की तुलना में कम ही होता है।

Multicap fund

 
Equity fund की सबसे लोकप्रिय श्रेणी मल्टीकैप फंड है। इसमे निवेशक की अप्रोच बैलेंसड रहती है।

इस फंड में फंड मैनेजर हर तरह के मार्किट कैप के स्टॉक को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करता है। इसलिए इसमे इक्विटी का diversification रहता है।

2. Debt fund

 
Debt fund को फ़िक्स्ड इन्कम फंड भी कहा जाता है ये उन इनवेस्टर के लिए अच्छा होता है जो कोई रिस्क नहीं लेना चाहते लेकिन debt Fund पर रिटर्न भी बहुत कम मिलता है।

एक फंड मैनेजर debt Fund को ऐसी सिक्योरिटीज मे निवेश करता है जिससे फ़िक्स इंकम होती है। जैसे कि ट्रेजरी बिल, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, कोम्र्सिअल पेपर या अन्य सरकारी व मार्केट इंस्ट्रूमेंट।

इन सब की एक फ़िक्स्ड मैच्योरिटी डेट व ब्याज होता है जिस से निवेशक को अपने निवेश पर फ़िक्स्ड इंकम प्राप्त होती है।
Debt fund मार्केट के उतार चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते इसलिए इनको Very low risk fund भी कहा जाता है।

3. Hybrid fund

 
Hybrid fund को बैलेंस फंड भी बोला जाता है। यह इक्विटी फंड और debt Fund का मिश्रण होता है अर्थात इसमें निवेशक के लिए इक्विटी फंड की भांति हाई रिटर्न की गुंजाइश रहती है साथ ही debt फंड के कारण मार्किट गिरने के समय निवेशकों को नुकसान भी कम होता है।
यह फंड मिश्रित अप्रोच वाले निवेशकों के लिए उत्तम है जिनको अच्छे रिटर्न के साथ मार्किट में गिरावट के साथ अपने पैसे की सुरक्षा भी चाहिए।
हाइब्रिड फंड को भी निवेशक की अप्रोच के हिसाब से दो भागों में बांटा जा सकता है 
a) equity ओरिएंटेड – इसमे 65% पैसा इक्विटी में निवेश होता है जबकि बाकी 35% debt में निवेशित रहता है।
b) debt ओरिएंटेड – इसमे फंड का अधिकतर भाग debt fund मे निवेश किया जाता है जबकि छोटा हिस्सा इक्विटी में निवेश किया जाता है। इक्विटी ओरिएंटेड की तुलना में debt ओरिएंटेड Fund मे निवेश ज्यादा सुरक्षित है लेकिन रिटर्न कम मिलता है।

4. Index fund

 
इंडेक्स फंड का सीधा मतलब अपने पोर्टफोलियो में विविधता से है। जब निवेशक ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहता और मुख्य मार्किट(nifty, sensex) के जितना रिटर्न चाहता है तो उसे इंडेक्स फंड में निवेश करना चाहिए।
भारत में मुख्‍य मार्किट की चाल NIFTYBSE SENSEX द्वारा दिखाई जाती है। निफ्टी में विभिन्न सैक्टर की 50 मुख्य कंपनियों और सेंसेक्स में 30 मुख्य कम्पनियों का अलग अलग अनुपात में वेटेज रहता है।
Stock मार्केट index निफ्टी व सेंसेक्स में अलग अलग सैक्टर व अलग अलग मार्किट कैपिटल की कंपनियां रहती है। इसलिए फंड मैनेजर अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए स्टॉक मार्केट इंडेक्स के समान अनुपात में इन कंपनी में निवेश करता है।

इसका सीधा मतलब ये है कि निवेशक को मुख्य स्टॉक मार्केट के जितना रिटर्न ही मिलता है। अगर NIFTY एक साल में 10% बढ़ी तो निवेशक के पैसे में भी लगभग 10% का इजाफा होता है।

5. Income fund

 

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है ये फंड एक नियमित आय देने के लिए जाने जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से रूढ़िवादी निवेशक जैसे कि सेवानिवृत्त लोग निवेश करते हैं जिनको अपने निवेश पर रिटर्न के साथ एक नियमित आय चाहिए होती है।टैक्स बचाने वाले निवेशकों को इन फंडों से दूर रहना चाहिए।

6. Sector fund

 
सैक्टर फंड वो फंड है जिसमे फंड मैनेजर अर्थव्यवस्था के किसी एक विशेष सैक्टर जैसे कि बैंकिंग, हेल्थ, ऑटो, टेक्नोलॉजी आदि की विभिन्न कंपनी को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करता है।

सैक्टर फंड में उस समय निवेश करना चाहिए जब किसी एक विशेष सैक्टर द्वारा बाकी मार्किट से ज्यादा ग्रोथ की संभावना हो। जैसे coronavirus महामारी के दौरान निवेशकों के लिए हेल्थ या फार्मा सैक्टर में निवेश करना फायदेमंद साबित हुआ है।

7. ETF (Exchange-traded fund)(m
utual fund definition)
 
Mutual fund का एक अन्य पॉपुलर विकल्प ETF या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है।

mutual fund vs ETF 

ETF और सामान्य म्यूचुअल फंड में एक सबसे बड़ी भिन्नता ये है कि ETF दिन में ट्रेडिंग hours के दौरान खरीदे व बेचे जा सकते हैं।
ETF पर अन्य म्यूचुअल फंड की अपेक्षा फीस भी कम लगती है। ETF पर टैक्स भी कम लगता है। इसलिए ETF ज्यादा कॉस्ट इफेक्टिव व लिक्विड होते हैं। 

म्यूचुअल फंड के फायदे(Advantage of mutual funds)

 

दशको से म्यूचुअल फंड रिटेल निवेशकों के लिए निवेश का सबसे बड़ा साधन रहा है। बहुत से ऐसे कारण है कि कर्मचारियों का रिटायरमेंट प्लान का बहुत सारा पैसा म्यूचुअल फंड्स में निवेशित रहता है।

विविधता(diversification) (mut
ual fund definition)
म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमे मार्किट रिस्क को कम करने के लिए पोर्टफ़ोलियो में निवेश और असेट का मिश्रण रहता है। 

एक म्यूचुअल फंड के पोर्टफ़ोलियो में विभिन्न सैक्टर की सौ से ज्यादा कंपनियो के स्टॉक रहते हैं। एक छोटे से रिटेल निवेशक के लिए थोड़े पैसे में इतने ज्यादा विविध स्टॉक्स में निवेश करना मुश्किल है। लेकिन म्यूचुअल फंड के द्वारा थोड़े पैसे को विभिन्न कंपनियों में निवेशित किया जाता है जिससे रिस्क कम होता है और रीटर्न भी अच्छा मिल जाता है। 

इस बात को इस उदाहरण से समझ सकते हैं मान लो किसी व्यक्ति ने tata motors कंपनी के शेयर 100 रुपए के भाव पर खरीदे। अब मान लो किसी कारण से कंपनी की परफॉर्मेंस कम हो गई जिसके कारण शेयर का दाम गिर कर 30 रुपए पर आ गया जिसका सीधा मतलब है कि निवेशक ने अपने 70% पैसे को खो दिया। 

वहीं उसने बराबर राशि किसी ऐसे म्यूचुअल फंड्स के द्वारा निवेश की जिसके पोर्टफ़ोलियो में टाटा मोटर्स सहित 100 से ज्यादा कंपनी के स्टॉक अलग अलग अनुपात में शामिल हैं।फंड के पोर्टफ़ोलियो में माना tata मोटर्स का वेटेज 2% है तो निवेशक को सिर्फ 2% का नुकसान हुआ लेकिन हो सकता है कि बाकी बचे कंपनियों के स्टॉक अच्छी परफॉर्मेंस दे और टाटा मोटर्स द्वारा की गई नुकसान की भरपाई कर दें। 

इसलिए एक तरफ सीधा एक कंपनी के स्टॉक मे निवेश करने पर आपका पूरा पैसा डूब सकता है लेकिन म्यूचुअल फंड के पोर्टफ़ोलियो में शामिल कंपनियों मे से अगर कोई कंपनी डूब भी जाए तो बाकी कंपनी निवेशक के नुकसान की भरपाई कर सकती है। 

Mutual funds are subjected to market risk. इस लाइन का मतलब है कि म्यूचुअल फंड का पैसा स्टॉक मार्केट में लगा होता है इसलिए स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव का म्यूचुअल फंड के रीटर्न पर सीधा असर पड़ता है। लेकिन म्यूचुअल फंड में स्टॉक की विविधता के कारण रिस्क बहुत हद तक कम हो जाता है। 

क्योंकि स्टॉक मार्केट में धन कमाने से ज्यादा धन बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर आपका पैसा बचा है तो समय बीतने पर वही पैसा आपको और पैसा कमा कर भी देगा। म्यूचुअल फंड की इसी विशेषता के कारण समझदार रिटेल निवेशक म्यूचुअल फंड को निवेश का सबसे बड़ा प्लैटफॉर्म मानते हैं। 

कम फीस पर प्रोफेशनल मैनेजमेंट

 
म्यूचुअल फंड का दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको minimal फीस पर किसी बड़े प्रोफेशनल मार्केट एक्सपर्ट द्वारा अपने निवेश को मैनेज करवाने का मौका मिलता है।

अधिकतर प्राइवेट गैर संस्थागत मनी मैनेजर उन्ही निवेशकों का निवेश मैनेज करते है जिनकी निवेशित राशि कम से कम 10 लाख रुपये हो। साथ ही इसकी एवज में मोटी फीस भी वसूल कर सकते हैं। 

लेकिन म्यूचुअल फंड आपको केवल 500 रुपये तक की निवेशित राशि को भी एक प्रोफेशनल एक्सपर्ट द्वारा मैनेज करवाने का अवसर प्रदान करता है वो भी नगण्य फीस पर। 

जरूरत के हिसाब से फंड चुनाव की आजादी

 
निवेशक को अपनी जरूरत और उद्देश्य के हिसाब से अपने फंड के बारे में रिसर्च करने की और चुनाव करने की आजादी मिलती है। निवेशक को पूरी आजादी है कि उसे value Fund (लो रिस्क लो रीटर्न) में निवेश करना है या growth fund(हाई रिस्क-हाई रीटर्न) फंड में। अगर निवेशक का लक्ष्य टैक्स को बचाना है तो वह ELSS फंड को चुन सकता है।
निवेशक बिल्कुल low risk ओर fixed income के लिए debt fund को चुन सकता है। कुछ फंड तो ऐसे हैं जो गिरते मार्केट में भी अच्छा रीटर्न देते हैं उन्हे bear Fund बोला जाता है।

म्यूचुअल फंड एकमात्र ऐसा प्लैटफॉर्म है जो हर तरह के निवेशकों और उनके उद्देश्य पूर्ति के लिए अलग तरह के फंड चुनने की आजादी प्रदान करता है।

पारदर्शीता(Mutual fund definition)

म्यूचुअल फंड में निवेशक को पूर्ण पारदर्शीता मिलती है क्योंकि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री रेग्युलेशन के अधीन है जिससे निवेशक को पूर्ण परदर्शिता और निष्पक्षता हासिल होती है।

म्यूचुअल फंड्स के नुकसान (disadvantage of mutual funds) 

 

More costly 

जैसा कि हम पहले डिस्कस कर चुके हैं म्यूचुअल फंड को एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है। जिसके लिए सभी निवेशकों को अपने निवेश की कुछ राशि फीस के रूप में चुकानी पड़ती है जिसका प्रभाव बाद में टोटल payout पर पड़ता है। 

ये फीस और बोझ लगती है जब मार्किट में गिरावट के समय म्यूचुअल फंड नेगेटिव रीटर्न देता है। 

निवेशित पैसे का कुछ हिस्सा ब्लॉक रहता है 
किसी भी म्यूचुअल फंड के लिए लिक्विडिटी का होना बहुत जरूरी है क्योंकि प्रतिदिन बहुत सारे निवेशक म्यूचुअल फंड से redemption करते हैं। redemption का मोटा अर्थ अपने शेयर को बेचने से है।
इसलिए ऐसे निवेशकों को पैसे वापिस करने के लिए म्यूचुअल Fund के कुछ हिस्से को कैश के रूप में रखना पड़ता है। ये पैसा आइडल पड़ा रहता है जिसके कारण इस पैसे का निवेश नहीं हो पाता इस अवस्था को कॉस्ट ड्रैग भी बोलते हैं। 

1 thought on “Mutual fund definition: म्यूचुअल फंड क्या है और कितने प्रकार का होता है”

Leave a Comment